टेक की दुनिया में हर थोड़े दिन में कोई न कोई नया गैजेट आता है और छा जाता है। आजकल इंडिया में meta glasses का बड़ा शोर है। लोग पागलों की तरह इसे गूगल और यूट्यूब पर ढूंढ रहे हैं। जब मेटा ने रे-बैन के साथ मिलकर अपना चश्मा निकाला, तो सबको लगा कि ये भी पुराने गूगल ग्लास जैसा ही कुछ फ्लॉप होगा। पर हकीकत कुछ और ही निकली।
मैंने इस चश्मे को काफी गहराई से परखा है। पहली बात तो ये कि ये सिर्फ टशन दिखाने वाली चीज नहीं है। इसमें कुछ ऐसे फीचर्स हैं जो आपकी लाइफ को सच में थोड़ा आसान बना सकते हैं। पर सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इसके लिए 30,000 से 40,000 रुपये फूंकना सही है? इंडिया के हिसाब से इसके फायदे और नुकसान क्या हैं? चलिए, ज़रा विस्तार से समझते हैं।
Meta Glasses की असली कहानी और इसकी डिमांड
इसे मेटा और रे-बैन ने मिलकर बनाया है, जिसे दुनिया ‘Ray-Ban Meta Smart Glasses’ के नाम से जानती है। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि ये कोई भारी-भरकम मशीन जैसा नहीं दिखता। पहली बार देखने पर आपको लगेगा कि ये तो नॉर्मल रे-बैन वेफेयरर ही है। यही इसकी सबसे बड़ी जीत है।
पुराने स्मार्ट चश्मों के साथ दिक्कत ये थी कि उन्हें पहनकर बाहर निकलने में थोड़ी शर्म आती थी। लोग आपको ऐसे घूरते थे जैसे आप किसी दूसरी दुनिया से आए हों। मेटा ने इस झंझट को ही खत्म कर दिया। उन्होंने स्मार्ट तकनीक को स्टाइल के पीछे बड़े करीने से छिपा लिया है।
इंडिया में रील बनाने वालों और यूट्यूबर्स के बीच इसकी दीवानगी अलग ही लेवल पर है। बिना हाथ में फोन पकड़े वीडियो शूट करना एक बहुत बड़ा प्लस पॉइंट बन गया है। इससे काम काफी आसान हो जाता है।
Ray-Ban Meta Glasses के वो फीचर्स जो काम के हैं
अगर आप इसे खरीदने का मन बना रहे हैं, तो सिर्फ लुक्स पर मत जाइए। आपको पता होना चाहिए कि इस छोटे से फ्रेम के अंदर एक पूरा कंप्यूटर फिट है। ये सिर्फ एक फ्रेम और शीशा नहीं है।
वो कैमरा जो आपकी आंखों का काम करता है
इसमें 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा लगा है। चूंकि ये कैमरा आपके चेहरे के ठीक बगल में होता है, तो ये वही रिकॉर्ड करता है जो आप अपनी आंखों से देख रहे होते हैं। इसे POV यानी ‘पॉइंट ऑफ व्यू’ शॉट कहते हैं।
ट्रैवल ब्लॉगर्स के लिए तो ये वरदान जैसा है। सोचिए, आप बाइक चला रहे हैं या कुछ पका रहे हैं और आपके दोनों हाथ बिजी हैं। बस एक बटन दबाया या आवाज दी और रिकॉर्डिंग शुरू। इसकी 1080p वीडियो क्वालिटी सोशल मीडिया के लिए एकदम परफेक्ट है।
खुले कानों से म्यूजिक का मजा
इसके डंडियों में छोटे-छोटे स्पीकर्स लगे हैं। ये कानों के अंदर नहीं घुसते, बल्कि बाहर से ही आवाज सुनाते हैं। इसे ओपन-ईयर ऑडियो कहते हैं। इससे फायदा ये है कि आप गाने भी सुन पाते हैं और सड़क पर चलते हुए गाड़ियों की आवाज भी मिस नहीं होती।
कॉलिंग के लिए इसमें 5 माइक्रोफोन दिए गए हैं। मैंने इसे भीड़ वाली जगहों पर भी टेस्ट किया है। सामने वाले को आपकी आवाज काफी साफ सुनाई देती है क्योंकि इसके माइक्रोफोन शोर को बहुत अच्छे से फिल्टर कर देते हैं।
मेटा AI: चश्मे में बैठा आपका पर्सनल असिस्टेंट
ये इस गैजेट की जान है। आप अपने चश्मे से बात कर सकते हैं। बस कहिए, “Hey Meta, look and tell me what I am looking at.” चश्मा फोटो खींचेगा और आपको बोलकर बता देगा कि आपके सामने क्या चीज है।
अगर आप किसी विदेशी भाषा का बोर्ड देख रहे हैं, तो ये उसे ट्रांसलेट भी कर सकता है। हालांकि, इंडिया में अभी इसके सारे फीचर्स पूरी तरह चालू नहीं हुए हैं, पर जितने भी हैं, वो काफी कूल लगते हैं। ये आपके मैसेज पढ़ सकता है और व्हाट्सएप पर रिप्लाई भी भेज सकता है।
भारत में इसकी कीमत और खरीदने का जुगाड़
अब आते हैं सबसे जरूरी बात पर—जेब पर कितना असर पड़ेगा? दिक्कत ये है कि मेटा इसे इंडिया में ऑफिशियली नहीं बेचता। आपको इसे या तो बाहर से मंगवाना पड़ेगा या उन चुनिंदा सेलर्स से लेना होगा जो इसे इम्पोर्ट करते हैं।
अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 299 डॉलर है। लेकिन जब ये इंडिया पहुँचता है, तो कस्टम ड्यूटी और सेलर के मुनाफे के बाद इसकी कीमत 35,000 से 45,000 रुपये के बीच हो जाती है।
खरीदने से पहले इन बातों को गाँठ बांध लें:
- वारंटी का बड़ा रिस्क है। अगर चश्मा खराब हुआ, तो इंडिया में कोई ऑफिशियल सर्विस सेंटर नहीं मिलेगा।
- मेटा व्यू ऐप को सेटअप करने के लिए कभी-कभी VPN की जरूरत पड़ सकती है, हालांकि अब ये इंडियन प्ले स्टोर पर भी मिलने लगा है।
- बैटरी लाइफ सिर्फ 4 घंटे के आसपास है। अगर आप बहुत ज्यादा वीडियो बनाएंगे तो ये जल्दी दम तोड़ देगा। हालांकि इसका केस इसे बार-बार चार्ज कर देता है।
क्या आपकी प्राइवेसी खतरे में है?
जब भी किसी चश्मे में कैमरा होता है, तो प्राइवेसी की बात होना लाजिमी है। मेटा ने इसके लिए एक छोटी सी LED लाइट दी है जो रिकॉर्डिंग के वक्त जलती है।
कंपनी का कहना है कि अगर आप उस लाइट को टेप से ढक देंगे, तो कैमरा काम नहीं करेगा। ये एक अच्छी सुरक्षा है। लेकिन फिर भी, पब्लिक प्लेस में इसे पहनकर दूसरों की मर्जी के बिना रिकॉर्डिंग करना गलत है। इंडिया जैसे देश में जहाँ लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर अब सजग हो रहे हैं, आपको इसे पहनकर थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।
मेरा अनुभव: क्या आपको ये पैसे खर्च करने चाहिए?
इसे इस्तेमाल करने के बाद मैं यही कहूँगा कि ये चश्मा हर किसी के लिए नहीं बना है। अगर आप सिर्फ गाने सुनने के लिए इसे ले रहे हैं, तो रुक जाइए। इतने पैसे में बहुत अच्छे हेडफोन्स आ जाएंगे।
ये चश्मा उन लोगों के लिए बेस्ट है जो:
- कंटेंट क्रिएटर हैं और हटके शॉट्स लेना चाहते हैं।
- गैजेट्स के शौकीन हैं और नई तकनीक को सबसे पहले आजमाना चाहते हैं।
- जो लोग बहुत ज्यादा ट्रैवल करते हैं और यादों को बिना फोन निकाले कैद करना चाहते हैं।
एक अच्छी बात ये है कि आप इसके शीशे अपनी जरूरत के हिसाब से बदलवा सकते हैं। आप इसमें पावर वाले लेंस भी लगवा सकते हैं, यानी ये आपका रेगुलर चश्मा भी बन सकता है।
लेकिन इसकी कुछ कमियां भी हैं। रात के समय कैमरे की क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं रहती। साथ ही, इसका वजन साधारण चश्मे से थोड़ा ज्यादा है, तो लंबे समय तक पहनने पर नाक पर भारी लग सकता है।
निष्कर्ष: भविष्य की एक झलक
meta glasses हमें दिखाते हैं कि आने वाले सालों में हम तकनीक का इस्तेमाल कैसे करेंगे। फोन अब धीरे-धीरे जेब से निकलकर हमारी आंखों और कानों तक पहुँच रहा है। ये चश्मा पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, पर ये उस दिशा में एक बहुत दमदार कदम है।
अगर आपके पास खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसे हैं और आप नई चीजें ट्राई करना पसंद करते हैं, तो आप इसे ले सकते हैं। ये आपको एक अलग ही दुनिया का अहसास कराएगा। लेकिन अगर आप एक वैल्यू-फॉर-मनी गैजेट ढूंढ रहे हैं, तो शायद आपको इसके अगले वर्जन का इंतजार करना चाहिए।
आखिर में, ये सिर्फ एक गैजेट नहीं है, बल्कि एक अनुभव है। आप इसे पहनकर दुनिया को एक अलग नजरिए से देखते हैं और दुनिया आपको एक अलग नजरिए से देखती है। फैसला आपका है कि आप इस बदलाव के लिए तैयार हैं या नहीं।
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